August 13, 2009

भारत को तोड़ना आखिर क्यों आसान है?


देश की विविधता ही हमारी दुश्मन बन रही है
दोस्तों, एक चीनी उल्लू के पट्ठे सामरिक रणनीतिकार ने कुछ दिन पहले अपनी अक्ल चला दी। उसके अनुसार भारत धर्म के आधार पर बहुत बँटा हुआ है। कई अन्य तरह से भी वहाँ भेदभाव है। इस सबका फायदा उठाते हुए चीन को अपने मित्र राष्ट्र पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और भूटान की मदद से भारतीय संघ को 20-30 टुकड़ों में तोड़ देना चाहिए। झान लुई नामक इस गधे रणनीतिकार के अनुसार चीन को असमी, तमिल और कश्मीरी जैसी विभिन्न राष्ट्रीयताओं के साथ एकजुट होना चाहिए और उनके स्वतंत्र राष्ट्र की स्थापना में सहयोग देना चाहिए। लेख में विशेष रूप से भारत से असम की स्वतंत्रता हासिल करने के लिए चीन को यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) का सहयोग करने को कहा गया है।

तो दोस्तों, यह बात मैंने आपको कोई नई नहीं बताई क्योंकि मीडिया में सबदूर यह मुद्दा आ चुका है। लेकिन उस खबर को पढ़ने के बाद कुछ बातों पर मैंने चिंतन जरूर किया। मैंने सोचा कि चीन जो सोच रहा है वो गलत नहीं है। वो जानता है कि भारत रीएक्शन देने में देरी करता है। या कहें कि रिएक्शन करता ही नहीं है। अंदर से खोखले या कहें कमजोर हो गए हैं हम। क्यों, उदाहरण के लिए चीन को ही देखिए, वो मुसलमानों को अपना दोस्त बताता है। मुस्लिम राष्ट्रों के पक्ष में खड़ा रहता है लेकिन उसके दूरस्थ पश्चिमी क्षेत्र जिनजियांग में उइगर मुस्लिमों ने जरा हल्ला मचा दिया और 15 चीनियों को क्या मार दिया, चीन ने सैंकड़ों उइगर मुसलमान मार दिए, और उस रिएक्शन को कंट्रोल करने के लिए 50 हजार सैनिकों की बटालियन उस क्षेत्र में तैनात कर दी। मजेदार बात यह है कि संसार भर के मुसलमानों को अपना भाई बताने वाले पाकिस्तान ने चीन के इस कदम का समर्थन किया और उसकी हर बात में हाँ में हाँ मिलाई। यह सब चीन के प्रेशर का कमाल है। यह ठीक उसी तरह है कि पाकिस्तान ने तालीबान खड़ा किया, आतंकवादी पैदा किए लेकिन जब अमेरिका का प्रेशर पड़ा तो उन्हीं आतंकियों और तालीबानियों को अब चुन-चुनकर मार रहा है और बैतुल्लाह मसूद के मरने की सगर्व पुष्टि कर रहा है।

बाद चूँकी अमेरिका की निकली तो उसके संबंध में सिर्फ इतना ही कि तालीबान या कहें ओसामा के अल कायदा ने उसकी दो बड़ी इमारतें गिरा दीं जिसमें 3500 अमेरिकी मारे गए। अमेरिका महाशक्ति है इसलिए उसे बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। लेकिन उसने सोच रखा था कि इस बड़े नुकसान की भरपाई भी वह बड़े तरीके से ही करेगा। आज वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की इमारतों को गिरे आठ साल हो गए हैं। इस बीच अमेरिका ने पहले अफगानिस्तान और फिर इराक पर कब्जा किया। कुल मिलाकर 15 लाख मुसलमान मारे जा चुके हैं (ये अफगानिस्तानी और इराकी नागरिक हैं, धर्म का उल्लेख इसलिए किया क्योंकि इस्लामिक दुनिया इसे इस्लाम और ईसाइयों का झगड़ा मानकर ही देख रही है)। अमेरिका ने एक दूसरा काम भी किया, उसने इन दोनों देशों पर कब्जा करके इन क्षेत्र विशेषों पर नजर रखने के लिए जमीन तलाश ली। उसे चीन से खतरा है इसलिए वो अफगानिस्तान (ठीक चीन के बगल में) में आकर बैठ गया। इरान से खतरा है इसलिए इराक में जाकर बैठ गया, उत्तरी कोरिया से खतरा है इसलिए वो ताइवान और जापान में भी जमा बैठा है। जो लोग पाकिस्तान गए हैं उन्हें पता है कि वहाँ दीवारों पर लिखा रहता है कि रूस के बाद अमेरिका और फिर हिन्दोस्तान की बारी। मतलब पाकिस्तानियों को लगता है कि उन्होंने अफगानिस्तान से रूस को अपने बलबूते खदेड़ दिया था (हालांकि उसके पीछे भी अमेरिका ही था), अब वे अमेरिका को खदेड़ देंगे और फिर भारत का सत्यानाश कर देंगे। उनकी अक्ल के अनुसार इस्लाम से टकराने वाला हरेक व्यक्ति या राष्ट्र एक ना एक दिन नेस्तानाबूद होना ही है।

दोस्तों, आप लोग यह मत समझना कि मैं विषय से भटक गया हूँ। मैं सिर्फ यह बताना चाह रहा हूँ कि अगर किसी देश (महाशक्ति, और भारत भी अपने को महाशक्ति कहता है इसलिए जिक्र कर रहा हूँ) को जरा सा नुकसान होता है तो वो उसकी भरपाई किस हद तक जाकर करता है लेकिन हमारे पास सैंकड़ों उदाहरण हैं जब हम पिटकर चुपचाप आकर अपनी माँद में बैठ जाते हैं। नेशनल जियोग्राफिक के 'जेल्ड एब्राड' सीरियल में बताया गया कि विदेशियों को अगवा करने वाले सईद नामक एक युवक ने रोहित शर्मा नाम रखकर किस तरह से विदेशियों को अगवा किया, भारत को बदनाम किया और पकड़े जाने के बाद वो जेल में जब आराम फरमा रहा था उसी दौरान अफगानिस्तान ले जाए गए हमारे अपह्रत विमान के बदले उसे भी छुड़ा लिया गया। वो उन तीनों आतंकवादियों में शामिल था जिन्हें छोड़ा गया था। हम जिन्हें पकड़ लेते हैं (अफजल और कसाब टाइप आतंकी) उन्हें ही जब हम सजा नहीं दे पाते तो चीन, इजराइल या अमेरिका जैसी बढ़-चढ़कर कार्रवाई कैसे कर पाएँगे। वो देश ऐसा कर लेते हैं इसलिए उनकी दुनिया में इज्जत है। शक्तिशाली की ही दुनिया में इज्जत होती है। शांति, प्रेम और भाईचारे की बात कमजोर लोग करते हैं। हम कैसी महाशक्ति हैं कि हमारे पड़ोस का रणनीतिकार हमें 20-30 टुकुड़ों में आसानी से तोड़ने की बात कर रहा है। दरअसल वो जानता है कि हममें इच्छाशक्ति की कमी है जिसका फायदा हमारा दुश्मन चीन उठा सकता है।

अंत में चलते-चलते...
कि दोस्तों, अमेरिका को यह समझ आ गया है कि इस्लाम अपनी आबादी बढ़ाकर दुनिया पर कब्जा करना चाहता है, अब वह उनकी जनसंख्या वृद्धि को कंट्रोल करने के उपायों में लग गया है। वो उपाय क्या हैं वो अगली पोस्ट में, लेकिन उसने यह भी जान लिया है कि पाकिस्तान या अरब देश शक्ति व रुपयों से डरते हैं। अरब राष्ट्रों को उसने शक्ति से दबा रखा है तो पाकिस्तान को रुपए के बलबूते। वहाँ वो अरबों डॉलर देता है। अगर आज वो पाकिस्तान से हाथ हटा ले तो वो भरभरा कर गिर पड़ेगा। इसी बलबूते वो भाईयों को भाईयों (मुस्लिम) से ही मरवा रहा है। यही बात चीन ने भारत के लिए भी सोची है। लेकिन हमें उस चुंदे (छोटी आँखों वाले) देश को बताना होगा कि हम पाकिस्तान सरीखे कमजोर या लालची नहीं जो आपस में लड़ मरेंगे, लेकिन यह हमें नहीं, हमारी देश की सरकार और सेना को दिखाना होगा....हमें फुफकारना सीखना होगा, विषैला नाग बनना होगा, तभी हमपर क्षमा शोभेगी...दिनकर जी ने सच ही कहा है..
क्षमा शोभती उस भुगंज को जिसके पास गरल हो,
उसको क्या जो दंतहीन, विषरहित, विनीत, सरल हो।

आपका ही सचिन...।

6 comments:

मीनू खरे said...

बहुत अच्छी पोस्ट है सचिन पर क्या कभी भारत भी सुधर पाएगा??????? शायद नही. हम कायर और घोंचू थे, हम कायर और घोंचू ही बने रहना पसन्द करेंगे. "ललकार और मार" हमारे नेताओं की डिक्शनरी में है ही नही.

Mithilesh dubey said...

बहुत सही लिखा है आपने, लेकिन किया भी क्या जा सकता है,। हमारे हाथ मे तो कुछ भी नही है और जिनके हाथ मे है वह तो अंजान से खङे है। अब भारत सरकार की जैसे आदत सी हो गयी है कुछ न करने की।

मुनीश ( munish ) said...

With all due respect i 'd say " just shut up meenu ji " , times are changing and we shall never let the nefarious designs succeed ! Jai Hind ! Very important post Sachin , thank you.

Hanfee Sir IPS Wale Bhaijaan said...

Maza aa gaya, bahut khoj ke baad aapka blog mil paya. I like your way of presentation. Hum Indians ne bahut parivartan kiye hain, aur bache huain bhi kar hi denge, jub saath hoga naujavan brains ka, to apka sapna bhi poora ho jayega, sub aasaan ho jayega....
Many many happy returns of freedom writing & Happy 61st Independence day to u.

Hanfee Sir IPSwale Bhaijaan

संजय बेंगाणी said...

पोस्ट में भारत का गलत नक्शा लगा है.

Sachin said...

@ संजय जी, आपने बिल्कुल सही बात पकड़ी। पोस्ट में भारत का गलत नक्शा लगा हुआ है। टूटे हुए भारत का। यह मैंने जानबूझकर लगाया था। यह नक्शा मेरी पोस्ट से मेल खाता है। गूगल हो या अन्य अंतरराष्ट्रीय मैप्स की साइट, भारत का यही नक्शा दुनिया में प्रचलित है। डिसकवरी और नेशनल ज्योग्राफिक तो इसी नक्शे का प्रयोग करते हैं। दरअसल, दुनिया तो यही मानती है कि भारत का सिर अधूरा है, टूट चुका है। और इसी नक्शे को देखकर चीन जैसे राष्ट्रों की हिम्मत बढ़ती है।
@Hanfee Sir IPSwale Bhaijaan, धन्यवाद आपको, कि आपको यहाँ आकर अच्छा लगा। जब भी कुछ बातें मन में उमड़ती हैं तो आप मित्रों से शेयर कर लेता हूँ, बस, अपने लेवल पर अच्छा करने की कोशिश है।
बाकी सभी मित्रों को धन्यवाद - सचिन