January 10, 2009

सत्यम के डूबने के मायने..!!

संस्कृत कहावत है, अति सर्वत्र वर्जयते
दोस्तों, देश की चौथी सबसे बड़ी आईटी कंपनी सत्यम डूबने के कगार पर है। आज हालांकि उसके कर्मचारियों ने दृढ़ता का प्रदर्शन करते हुए कई होर्डिंग्स और बोर्ड के माध्यम से लोगों को समझाया कि वे एकजुट हैं और प्रबंधन पर उनका पूरा भरोसा है लेकिन कहा जा सकता है कि गालिब ये तो दिल समझाने की बात है। दुनिया के आगे बंद मुठ्ठी खुल चुकी है। सत्यम का दिवाला निकलनेवाला है और जो कर्मचारी इन बोर्ड और होर्डिंग को लगाकर अपनी एकजुटता का प्रदर्शन कर रहे थे वे खुद दूसरी नौकरियाँ ढूँढने लगे हैं। खबर मिली है कि सत्यम अपने ५३००० कर्मचारियों में से १५००० की छंटनी तुरंत करने वाली है जबकि जो रोके जाएँगे उनके वेतन में भारी कटौती होगी। उल्लेखनीय है कि सत्यम को अपने स्टॉफ को प्रत्येक माह वेतन बाँटने के लिए ५०० करोड़ रुपए की आवश्यकता पड़ती है जो इस समय उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। सत्यम ने कल एक लैटर जारी कर सभी कर्मचारियों को ये भी कह दिया था कि उनका दो महीने का वेतन रोका जा रहा है।
दोस्तों, आप बचपन से ही एक कहावत सुनते आ रहे होंगे। यह संस्कृत में है। अति सर्वत्र वर्जयते। यानी सीमा से बाहर जाकर कुछ भी करने में नुकसान है। फिर भले ही वो काम किसी भी देश, काल या परिस्थिति में किया जाए। भारत का सॉफ्टवेयर में जो डंका पिछले एक दशक से बज रहा था वो भी वर्जित ही था और समझने वाली बात है कि इस फुग्गे को एक ना एक दिन फूटना ही था। दुनिया में मंदी आई। इसका सबसे अधिक प्रभाव भी सबसे अधिक फूले हुए फुग्गे यानी अमेरिका पर ही हुआ। उसकी हवा फुस्स से निकल गई। वहाँ के कई लीजेण्डरी बैंक स्वाहा हो गए और सब बड़ी-बड़ी बातें धरी की धरी रह गईं। यही काम कुछ हमारे यहाँ आईसीआईसी बैंक के साथ हुआ। यह फुग्गा भी बहुत फूल गया था। ये बैंक एक साल में २०-३० हजार करोड़ रुपए के हाउसिंग लोन दे रही थी। प्रापर्टी की कीमतें भी आसमान छू रही थीं। जाहिर है सब जगह रुपया बह रहा था और किसी ने नहीं सोचा था कि एक दिन यह सब भी देखना पड़ेगा।
दोस्तों, आपने एक बात महसूस की होगी। जब आदमी के दिन अच्छे चल रहे होते हैं तो सब उसके आगे झुकना शुरू कर देते हैं और वो भी सफलता के मद में कईयों का अपमान या कहें बुरा करने लगता है। उस आदमी को लगता है कि ये दिन चिरजीवी हैं और उसके बुरे दिन कभी नहीं आएँगे...और जब बुरे दिन शुरू होते हैं तो सब साथ छोड़ जाते हैं और कहते हैं कि वो तो बहुत बुरा था उसके साथ तो ऐसा होना ही था। ठीक यही काम भारतीय शेयर बाजार के साथ भी हुआ। जब ये २१००० पर था तो विश्लेषक कहते थे कि ये ४५०००-५०००० पर जाएगा और जब ये नीचे गिरा तो वही विश्लेषक कहने लगे कि ये पाँच हजार तक पहुँच जाएगा। ठीक यही हाल देश में बैंकिंग सेक्टर, प्रापर्टी, जीवन बीमा और आईटी सेक्टर का हो रहा है। दोस्तों, मैं यहाँ ये कहना चाह रहा हूँ कि जब जेब में रुपया होगा ही नहीं तो खर्च करने का सवाल ही कहाँ उठता है। जो आईटी कंपनियाँ अपने यहाँ काम करने वाले एक २५ साल के लड़के को ५०००० रुपया महीना दे रही थीं आज वे उसे १५ हजार रुपए महीने भी नहीं देना चाह रही हैं। क्योंकि उन कंपनियों के फुग्गे में पिन पड़ चुकी है। उन्होंने जरूरत से ज्यादा मुनाफा कमाया और उसे बाँटा भी लेकिन वो काम ठोस नहीं था। जरा सी मंदी में इन सबकी हवा निकल गई। चूँकी लोगों के वेतन कम हो रहे हैं तो उनके वेतन की ताकत पर चलने वाले बैंक, बीमा और प्रापर्टी के सेक्टरों में मंदी क्यों नहीं आएगी...???
सत्यम के राजू ने हर्षद मेहता बराबर स्कैम किया। वो दिखाना चाहते थे कि वे कभी घाटे में नहीं आ सकते। तो उन्होंने औसत से ज्यादा मुनाफा दिखाने के चक्कर में इतना झूठ बोला कि कंपनी की संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा ही झूठा दिखा दिया। परिवारवाद यहाँ भी हावी था तो अपने बेटों की कंपनी मेटास का अधिग्रहण करने के चक्कर में घाटा और बढ़ा दिया। लेकिन राजू का ये झूठ चल रहा था और चलता भी रहता अगर ये मंदी ना आई होती। इस मंदी ने राजू का असली रंग सामने ला दिया और वो रंगे हुए सियार साबित हुए। अब सभी देशी-विदेशी कंपनियाँ भारतीय आईटी कंपनियों को संदिग्ध नजरों से देखेंगी क्योंकि जब अमेरिका को डराकर रखने वाले राजू ऐसे निकल सकते हैं तो फिर किसी और के बारे में क्या कहा जाए...?? और दोस्तों, आखिर में चलते-चलते बस इतना ही कि राजू एक छोटे से आदमी थे, फिर अपने पुरुषार्थ के बल पर इतने बड़े आदमी बने....लेकिन भगवान ने इंसान के अंदर जो लालच नाम का कीड़ा बनाया है वो कभी भी किसी को भी काट सकता है। बस राजू इसी का शिकार बन गए नहीं तो इंसान को अंत में क्या चाहिए, बस दो गज जमीन....मंदी ने राजू का झूठ पकड़ में ला दिया।
आपका ही सचिन...।

3 comments:

P.N. Subramanian said...

इसे राजू का अत्याग्रह ही कहा जा सकता है. भारतीय कंपनियों की विश्वसनीयता संदेह के घेरे में आ गई है..आभार.

शाश्‍वत शेखर said...

दूसरी तिमाही में जो बैलेंस शीट दिखाई गई और जो तीसरी तिमाही में दिखायी जाने वाली है वो शक के घेरे में आ गयीं हैं|

Amit said...

bahut hi sahi kaha aapne...