January 23, 2009

गोरेपन और सफलता के बीच संबंध..!!

गोरे रंग का भूत अभी तक हमारे सिर पर सवार है
पिछले काफी समय से टीवी पर एक विज्ञापन देख रहा हूं..यह एक विज्ञापन नहीं बल्कि विज्ञापनों की पूरी एक सीरीज है...औरतों और मर्दों दोनों के लिए है....फेयर एंड लवली वालों ने बनाई है.....वे खुशखबरी दे रहे हैं कि अब वे मर्दों के लिए भी गोरेपन वाली क्रीम ले आए हैं.....यानी अब मर्दों को काले रहने की जरूरत नहीं है......वे भी दूसरे गोरों की तरह इस रंग को अपनाकर शानदार सफलता पा सकते हैं...दूसरी ओर लड़कियों वाला विज्ञापन तो है ही जिसमें इस क्रीम को लड़कियां सात दिन तक लगाती हैं और उसके बाद उनमें से कोई एयरहोस्टेस बन जाती है तो कोई फिल्म स्टार बन जाती है.....कोई टीवी स्टार बनती है तो कोई न्यूज एंकर बन जाती है....इन क्रीम वालों का बस चले तो यह पूरे हिन्दुस्तान को ही गोरा बना दें और सबको सफल...!!!!!!
तो भाईयों और बहनों (माफ किजिए यह शब्द सब के लिए नहीं कह रहा हूं.......जो गोरी होंगी उनके लिए बहन करने से पहले सोचूंगा.....हा...हा) खैर भारत पिछले पांच हजार सालों (इतिहासविदों की नजरों में) और लाखों सालों (हमारे धर्म के अनुसार) से कई रंग-रूपों वाले लोगों का घर रहा है.....काश वे लोग यह जान पाते कि फेयर एंड लवली इस समय सबको गोरा किए दे रही है तो उन्हें तब पैदा होने का अफसोस जरूर हुआ होता।
तो एक किस्सा....किसी ने पं. नेहरू से एक पार्टी में पूछा था (यह पार्टी ब्रिटेन में हो रही थी) कि जिस तरह हमारे देश में सब लोगों का रंग एक ही है वैसा ही आपके देश में क्यों नहीं है.....या आपके देश में इतने रंगों के लोग कैसे मिलते हैं......तो नेहरूजी ने कहा था कि गधे सब जगह एक ही रंग के होते हैं जबकि घोड़े कई रंगों में पाए जाते हैं.......तो भई यह तो हो गई मजाक वाली बात लेकिन असलियत उल्टी है......हम भारतीय गोरे रंग वालों को घोड़ा और काले, हल्के या भूरे रंग वालों को गधा मानते हैं.......यह गोरा रंग हमारे ऊपर इस कदर हावी है कि लोग शादी के लिए भी लड़की में गोरापन ढूंढते हैं जैसे गोरी होकर वह क्या निहाल कर लेगी....?????? आश्चर्य है कि हमारे इस आदर्शों वाले देश को यह क्या हो गया है......माना कि अंग्रेज हमारी छाती पर २५० साल चढ़े रहे.......लेकिन उनके उतरने के बाद उनकी भाषा और उनका रंग इतने सालों तक चढ़ा रहेगा यह किसी ने नहीं सोचा था.....अगर आप लंबे हैं और गौरांग है तो अपनी सफलता की गारंटी मानिए....और अगर कोई लड़की गोरी है तो माता-पिता को उसकी शादी और दहेज की समस्या से मुक्त मिल गई समझो....हद हो गई.....गुणों की कद्र करने वाले इस देश में यह क्या.....और इस बात को इस क्रीम बनाने वाली कंपनी ने लपक लिया और अब वो हमारी कमजोरी पर प्रहार कर-करके कह रही है कि जल्दी से गोरा बन जाओ नहीं तो असफलता हाथ लगेगी..।
वैसे गोरे रंग का इतिहास लंबा है.....इस रंग के लोग दुनिया को बचा रहे हैं और वाइट मैन्स बर्डन थ्योरी का बाजा पिछले कई सौ सालों से बजा रहे हैं...लेकिन हम भारतीयों के सिर पर यह बाजा इतना असर करेगा कि लोग गोरा होने के लिए क्रीम का इस्तेमाल करने लगेंगे तो क्या होगा सोचो.....कोई कह सकता है कि एक विज्ञापन को लेकर इतनी लंबी-चौड़ी बात क्यों....तो साहब यह विज्ञापन कई सालों से सिर्फ इसी बूते चल रहा है कि इस देश की युवतियां इस क्रीम को खरीद रही हैं (गोरा होने के लिए)...अन्यथा किसी कंपनी में दम नहीं है कि अपने ना बिकने वाले ब्रांड का ऐसा प्रचार करे...तो अंत में सिर्फ यही कि इस क्रीम को नहीं खरीदना है...इसके पीछे दो बातें हैं.....एक यह की वाकई में इसे लगाने से कोई गोरा-वोरा नहीं होता.....और दूसरा यह कि क्रीम और उसका विज्ञापन भारतीय समाज की कुंठा को दर्शा रहे हैं......इसलिए इसे बंद होना चाहिए.....और एक बात यह भी कि अगर मैं उन भारतीयों (और वो भी गोरे नहीं)...का उदाहरण दूं जो महान हुए....सर्वकालिक महान.... तो समझो इस पन्ने जैसे कई पन्ने भरेंगे.....इसलिए उन्हें खोजने का काम आपका रहा.....।
आपका ही सचिन......।

8 comments:

डॉ .अनुराग said...

दरअसल मानक तो तय है .पर कोई पालन नही करता .वैसे भी इश्तिहारी ज़माना है भाई....जिसमे खामिया भी खूबिया सी लगती है.....वैसे इस कम्पनी की रिटर्न करोडो में है.......

संगीता पुरी said...

गोरेपन और सफलता के बीच संबंध हो न हो......गोरेपन और भाग्‍य के बीच तो अच्‍छा संबंध देखा गया है.....जहां गोरी होने के कारण लडकियों की शादी अच्‍छे परिवारों में हो जाती है..... वहीं अच्‍छे परिवारों की सांवली लडकियों को भी विवाह में परेशानियों का सामना करना पडता है।

Udan Tashtari said...

गोरेपन और सफलता के बीच संबंध-अपना तो कोई इस बात से सीधा साबका पड़ा नहीं, इसलिए कुछ भी न कह पायेंगे. बाकी बच रहे गोरे जाने.

शाश्‍वत शेखर said...

अजीब बात है, गोरे tan body के लिए मरे जा रहे हैं, हम गोरा बन्ने के लिए|

अल्पना वर्मा said...

aap ki baat sahi hai lekin yah kuntha sirf bharat mein hi nahin hai-balki---yahan arab deshon mein bhi hai--

aur sab se jyada aap ko yahi cream market mein bikti nazar aayegi--

200 saal ka angrezi raaz yah bhi de gaya hain hamen..gore hi sarvshreshth hain

विवेक सिंह said...

हम काले हैं तो क्या हुआ दिलवाले हैं .

makrand said...

accha lekh

Humtum18 said...

good news..
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