December 12, 2008

इस्लाम के लिए हथियार इतने जरूरी क्यों..??

किस बात की तैयारी है आखिर..??
आज कुछ ऐसे समाचार पढ़ रहा था जिनसे दुनिया की गति तय होनी वाली है। इनमें से दो समाचार पढ़े और इन्हें आपस में जोड़ने का प्रयास भी किया। लेकिन इससे पहले आप देखें कि क्या मेरा आकलन सही है॥।।
इस वैश्विक मंदी में भी अमेरिका के हथियारों का व्यापार फल-फूल रहा है। मौजूदा आर्थिक मंदी के कारण भले ही दुनिया भर के उद्योग त्राही-माम कर रहे हों लेकिन अमेरिका इस गैरवाजिब उद्योग से खूब धन कूट रहा है। आज जारी की गई एक अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल अमेरिका से दुनिया भर में ३२ अरब डॉलर के हथियार बेचे गए। इतना ही नहीं इन हथियारों में से आधे से अधिक की बिक्री उन विकासशील देशों में की गई जिनकी सरकारें लोकतांत्रिक नहीं हैं और उन राष्ट्रों पर मानवाधिकारों के हनन का भी आरोप लगता रहा है। अमेरिका की प्रमुख थिंक टैंक संस्था न्यू अमेरिका फाउंडेशन की रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल अमेरिका से किए गए हथियारों की बिक्री के २५ बड़े सौदों में से १३ विकासशील देशों के लिए हुए। इनमें से सबसे ज्यादा हथियार पाकिस्तान, सऊदी अरब, इराक, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, मिस्त्र, कोलंबिया, जार्डन, बहरीन, ओमान, मोरक्को, यमन और ट्यूनिशिया को बेचे गए। वर्ष २००६-२००७ में इन देशों को कुल १६.२ अरब डॉलर के हथियार बेचे गए।
दोस्तों, इस खबर को पढ़कर आप लोग ये तो समझ गए होंगे कि हथियारों की खरीदारी करने वाले ज्यादातर राष्ट्र इस्लामिक हैं और इनमें से अधिसंख्य तो वो हैं जिनका इतिहास युद्ध का नहीं है। तो क्या वे भविष्य की तैयारी के लिए है और अगर ऐसा है तो उनके मन में क्या विचार चल रहा है। हालांकि आप में से कई लोग आजकल लगातार मीडिया के संपर्क में रहते हुए ये जान रहे हैं कि असल में दुनिया में चल क्या रहा है लेकिन यहाँ मैं आपको एक दूसरी खबर सुना रहा हूँ और उसपर आई हुईं प्रतिक्रियाएँ भी बताता हूँ जिससे बात कुछ साफ हो सके। तो देखिए...
लंदन। अक्सर विवादों में रहने वाले पॉप स्टार माइकल जैक्सन ने धर्म परिवर्तन कर इस्लाम कबूल कर लिया है। उन्होंने अपना नाम भी बदलकर मिकाइल कर लिया है। वेबसाइट ' thesun.co.uk' के अनुसार 50 वर्षीय जैक्सन ने लॉस एंजिल्स में अपने मित्र के घर पर कुरान के प्रति आस्था व्यक्त की। उस समय उन्होंने इस्लामी लिबास धारण कर रखा था। जैक्सन को जमीन पर बैठाकर एक इमाम ने यह रस्म अदा करवाई। जैक्सन ने अपने एक नए संगीत एलबम के संगीत-निर्माता और गीतकार से चर्चा करने के बाद यह कदम उठाया। उन दोनों ने इस्लाम कबूल कर रखा है। उल्लेखनीय है कि मिकाइल अल्लाह के एक फरिश्ते का नाम है। दोस्तों, इस खबर पर जो प्रतिक्रियाएँ भारत से आईं हैं वो चौंकाने वाली हैं। जरा बानगी देखिए...- सारे जहाँ को इस्लाम के सिवाय कोई चारा नही। -Aman, Latur - सबको एक दिन इस्लाम में आना है। -junaid, delhi- हम उम्मीद करते है कि एक दिन सारा अमेरिका इस्लाम कबूल करेगा। अल्लाह ने चाहा तो ऐसा ही होगा। -Bahar Alam, Delhi
दोस्तों ये एक बानगी है। मैंने ये प्रतिक्रियाँ एक वैबसाइट पर पढ़ीं। लेकिन जो लोग ये सब कह रहे हैं वो सब भारत में रहते हैं ये बात सबसे ज्यादा खतरनाक है। शरीयत को मानने वाले राष्ट्र की परिकल्पना से दूर हैं और धर्म की ओर आसक्त हैं। मतलब जब भारत में रहने वाले मुस्लिम ये मानते हैं कि एक दिन पूरे संसार को इस्लाम के झंडे तले आना है और अमेरिका भी एक दिन इस्लाम कबूल करेगा, तो समझ जाइए वो क्या सोच रहे हैं...??? इस धर्म को मानने वाले कई लोगों को मैं जानता हूँ जिनके घर में खाने को नहीं है, बेरोजगारी है, घर में बहनों की शादी नहीं हो पाई है लेकिन धर्म के प्रति इतनी कट्टरता है कि बस वे माने जा रहे हैं कि दुनिया उनके धर्म के झंडे तले आने वाली है। ये सोच इस धर्म को, उसके मानने वालों को और इस संसार को कहाँ तक ले जाएगी इसपर आजकल काफी बहस हो रही है लेकिन इतना तय है कि अमेरिका को इस्लामी राष्ट्रों को हथियार बेचने से पहले ये सोच लेना चाहिए कि कहीं वो उसके ऊपर प्रयोग करने के लिए ही तो नहीं खरीदे जा रहे। अगर ऐसा हो रहा है तो हम एक भयानक भविष्य के मुहाने पर खड़े हैं।
आपका ही सचिन...।

4 comments:

ab inconvenienti said...

यह पोस्ट कुछ अधूरी लग रही है, इसमे काफ़ी कुछ जोड़ना अभी बाकी है. तभी इस मुद्दे की गहरे से पड़ताल हो सकेगी. मेरी अगली पोस्ट आपके इसी आलेख का विस्तार होगी.

Sachin said...

अभिषेक आपने बिल्कुल ठीक कहा, ये पोस्ट अभी अधूरी है। आपकी पोस्ट का स्वागत है। और हाँ, इस मुद्दे पर अब मेरी कलम चलती रहेगी। अभी बहुत कुछ है लिखने को। लेकिन एक ही पोस्ट में ज्यादा कुछ लिखना नहीं चाह रहा था इसलिए इसे यहीं बंद कर दिया। तो फिर आगे भी पढ़िएगा।

chandrashekhar hada said...

ब्लॉग पर देख कर जाना कि आप इन्दोर में हैं और नईदुनिया में हैं । अच्छा लगा ।

तरूश्री शर्मा said...

to kya sachin...marx ne sahi kaha tha ki dharm samaj me affeem ki tarah kaam karta hai????