December 31, 2008

युद्ध की तैयारी के नाम पर जनता के रुपयों की बर्बादी

हमें पता है कि कुछ नहीं होने वाला
दोस्तों, अब तो कान पक गए हैं ये सुन-सुनकर की भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध छिड़ने वाला है। चलो ये मान लेते हैं कि हम (भारतीय, मैं नहीं) युद्ध वगैरह में विश्वास नहीं करते। तो फिर ये दिखावा करना बंद करो भाई, पूरी दुनिया में हँसी उड़ रही है हमारी। मालूम है पाकिस्तान हमारे बारे में क्या कह रहा है..?? वहाँ के मीडिया में खबर आई है कि भारत के तेज-तर्रार तेवरों के बीच पाकिस्तान ने जो दमखम दिखाया है उससे भारत की हिम्मत पस्त हो गई है और उसने आतंकी ठिकानों की शल्यक्रिया (आपरेशन) करने का इरादा त्याग दिया है। मतलब भारत पाकिस्तान से डर गया है। हालांकि पाकिस्तान का ये सोचना सही है क्योंकि भारत पिछले एक महीने से सिर्फ बयानबाजी ही कर रहा है और कल तो पाक विदेशमंत्री महमूद कुरैशी के बयान पर तो हमारे विदेशमंत्री प्रणब मुखर्जी ने ये तक कह दिया कि हमने तो कोई सेना पाक सीमा पर लगाई ही नहीं तो उसे हटाने का सवाल कहाँ उठता है..? 
दोस्तों, मेरे अखबार समेत देश के सारे अखबारों में ये खबरें और फोटो छपी हैं कि भारत ने अपनी वायुसेना को हाईअलर्ट कर दिया है। इस आशय के फोटो भी छपे हैं जिनमें टैंकों और अन्य सैनिक साजों सामान को ट्रेनों पर लदकर सीमा पर जाते दिखाया गया है। तो फिर विदेशमंत्री बात से क्यों मुकर रहे हैं। उधर पाक विदेशमंत्री की हिम्मत देखिए कि वो कह रहा है कि भारत तनाव कम करे। अरे मुंबई हमला करवाकर तनाव किसने पैदा किया......उसे कम करने की जिम्मेदारी अब हमारी नहीं पाकिस्तान की है। आज तो यह भी साफ हो गया है कि ये हमला लश्कर-ए-तैयबा ने करवाया था जिसकी जिम्मेदारी अब उसके एक शीर्ष कमांडर जरार शाह ने ले ली है। तो भारत को अपनी किसी भी बात को कहने के लिए अमेरिका का सहारा क्यों लेना पड़ता है। जैसे कि बुधवार को अमेरिका ने पाकिस्तान से कहा कि वो लखवी (मुंबई हमले का मास्टरमाइंड) को भारत के हवाले करे। ये बात हम क्यों नहीं कह सकते, और कहते भी हैं तो वो मानी क्यों नहीं जाती..??
भारत सरकार जनता की गाढ़ी कमाई को बर्बाद कर रही है। यह काम भाजपा सरकार भी २००१ में संसद पर हमले के बाद कर चुकी है। मतलब समझे आप....यानी भारतीय सेना को सीमा पर तैनात करने का सिर्फ खर्चा ही १३५०० करोड़ है। इतना रुपया किसलिए बर्बाद करना जबकि हमारे नेताओं में इच्छाशक्ति ही नहीं है। अगर आपको सैन्य कार्रवाई नहीं करनी तो जनता को क्यों हैरान कर रखा है.....हमें क्यों इस भरोसे में रख रखा है कि इस बार उन कमीने आतंकियों की खाल खींच ली जाएगी जो हर बार हमारी इज्जत लेकर चले जाते हैं। 
पिछले २० सालों में भारत में अब तक हुए आतंकी हमलों में जितनी जानें गई हैं उससे कई गुणा कम जानें भारत द्वारा पाकिस्तान के साथ लड़े गए चारों युद्धों में गई हैं। तो फिर अगर हम पाक पर हमला करना नहीं चाहते तो कम से कम पाक अधिकृत कश्मीर में स्थित आतंकी शिविरों पर ही हमला करें। उन्हें नेस्तानाबूद करें। हमें अपनी विराट शक्ति का तो प्रदर्शन करना ही चाहिए ना, नहीं तो कौन डरेगा हमसे..?? लेकिन सरकार के बयानों से तो ऐसा कुछ नहीं लग रहा। 


भारत-पाकिस्तान के बीच हुए युद्धों में मारे गए सैनकों का लेखा-जोखा

१९४७ में - पाकिस्तान के २६३३ सैनिक मारे गए जबकि भारत के ११०४ सैनिक शहीद हुए।
१९६५ में - पाकिस्तान के ३८०० सैनिक मारे गए जबकि भारत के ३२६४ सैनिक शहीद हुए।
१९७१ में - पाकिस्तान के ७९०० सैनिक मारे गए जबकि भारत के ३८४३ सैनिक शहीद हुए। 
१९९९ में - पाकिस्तान के ६९६ सैनिक मारे गए जबकि भारत के ५२७ सैनिक शहीद हुए। 

जबकि पिछले २० सालों में भारत के ७० हजार से ज्यादा नागरिक आतंकवाद की भेंट चढ़ चुके हैं। अगर हम युद्ध लड़ते तो इतनी संख्या में लोगों को हमें कभी नहीं गँवाना पड़ता।

आपका ही सचिन.....।

4 comments:

sareetha said...

छोडो कल की बातें कल की बात पुरानी । नए दौर में लिखेंगे हम मिलकर नई कहानी हम हिन्दुस्तानी ।नया साल आ रहा है नए सपनों की पोटली लेकर । स्वागत कीजिए । शुभकामनाएं ।

शुभम आर्य said...

नया साल आए बन के उजाला
खुल जाए आपकी किस्मत का ताला|
चाँद तारे भी आप पर ही रौशनी डाले
हमेशा आप पे रहे मेहरबान उपरवाला ||

नूतन वर्ष मंगलमय हो |

Suresh Chiplunkar said...

सचिन भाई आपका गुस्सा जायज़ है, लेकिन क्या करें हमारे नेताओं की रगों में जोश नहीं है, जनता भी तो मुम्बई को भूलकर मूर्खों की तरह नववर्ष की पार्टियों में मस्त थी… "यथा प्रजा तथा राजा"। क्या कभी जनता ने किसी भ्रष्ट नेता को चौराहे पर लाकर नंगा कर के पीटा है? फ़िर कैसे उम्मीद रखते हैं कि "अहिंसावाद" का जाप करने वाले, "गीता के कर्म" सिद्धांत पर अकर्मण्य बहस करने वाले नेता कुछ करेंगे…

संजय बेंगाणी said...

दबाव की रणनीति है.